आगरा के थाना मलपुरा के एक गांव में डेढ़ साल की मासूम का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म किए जाने के मामले में दोष सिद्ध पाए गए धनौली के मुकेश उर्फ लुक्का (35) को आखिरी सांस तक कारावास की सजा सुनाई गई है।
बृहस्पतिवार को स्पेशल जज (पॉक्सो एक्ट) वीके जैसवाल ने उस पर दो लाख का अर्थदंड भी लगाया है। बच्ची खून से लथपथ अवस्था में खेत में मिली थी। लुक्का उसे उसके पिता की चाऊमीन की ठेल से उठाकर ले गया था।
यह दरिंदगी 24 मार्च, 2018 की शाम को हुई थी। बच्ची पिता के पास बैठी थी। पिता चाऊमीन बेचने में व्यस्त था। इसी बीच लुक्का बच्ची को चुपचाप उठा ले गया। थोड़ी देर बाद बच्ची को वहां न देख पिता घर गया। बच्ची वहां भी नहीं थी।
इस पर वह पत्नी को साथ लेकर तलाश में लग गए। इसी दौरान तीन युवकों ने बताया कि उन्होंने बच्ची को लुक्का के साथ देखा है। ये लोग लुक्का की तलाश कर ही रहे थे कि एक खेत से बच्ची के रोने की आवाज आई।
ये लोग खेत के अंदर पहुंचे तो लुक्का दरिंदगी कर चुका था। वह वहां से भाग गया। बच्ची खून से लथपथ अवस्था में थी। बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया। सूचना पर पुलिस ने केस दर्ज कर लुक्का को गिरफ्तार कर लिया।
विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो एक्ट) विमलेश आनंद ने बताया कि अभियुक्त के खिलाफ 14 गवाह और साक्ष्य पेश किए। कोर्ट ने उसे आखिरी सांस तक जेल में रखे जाने की सजा सुनाई है। अर्थदंड की राशि में से आधी बच्ची के माता-पिता को दी जाएगी।
जज की टिप्पणी : ऐसे राक्षस को समाज में रहने का अधिकार नहीं ...
जज ने दुष्कर्मी पर टिप्पणी की है कि मात्र डेढ़ साल की मासूम, जो एक खिलौने की तरह है, उससे ऐसा घिनौना कृत्य करने वाला राक्षस है, उसे समाज में रहने का अधिकार नहीं, और न ही वह मनुष्य कहलाने लायक है। उसके इस दुष्कृत्य से न केवल समाज, बल्कि पूरी मानवता शर्मसार हुई है।